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श्रीमद्भगवद्गीता : जीवन का अर्थ खोलकर समझाने वाली एक चिंतन-यात्रा
लेखमाला के आरंभ में दो शब्द… प्रिय पाठकों, सस्नेह नमस्कार! मानव जीवन सुख-दुख, आशा-निराशा, सफलता-असफलता, कर्तव्य और जिम्मेदारियों से भरी एक यात्रा है। इस यात्रा में कभी आनंद के क्षण आते हैं, तो कभी संकटों के काले बादल मन पर छा जाते हैं। कभी क्या करना चाहिए, यह स्पष्ट समझ आता है, तो कभी उचित-अनुचित…
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भगवद्गीता ब्लॉग लेखमाला — अध्याय १ : अर्जुनविषादयोग
कुरुक्षेत्र की पृष्ठभूमि और पहला प्रश्न मुख्य संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 1–11 प्रस्तावना मानव जीवन में कुछ ऐसे प्रसंग आते हैं, जब हमारे सामने दो रास्ते होते हैं। एक रास्ता स्वार्थ का होता है, तो दूसरा कर्तव्य का। कभी-कभी सही और गलत का ज्ञान होने के बावजूद निर्णय लेना कठिन हो जाता है। महाभारत…